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विदेशी मीडिया में ज्ञानेश कुमार विरोध: ब्रिटेन से पाकिस्तान तक विविध कवरेज

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर विशेष इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप और उनके इस्तीफ़े की माँग ने भारत में ही नहीं, बल्कि कई विदेशी समाचार एजेंसियों में भी व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। विपक्षी नेताओं और युवा आंदोलन ने दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शन किया, जबकि अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों ने इसे अलग-अलग दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया।

ब्रिटेन के द गार्डियन का विश्लेषण

द गार्डियन ने 5 अक्टूबर को रिपोर्ट में बताया कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मतदाता सूची से करोड़ों नाम हटाने से जुड़ी विवादास्पद प्रक्रिया को चुनौती दी है। लेख में कहा गया कि विरोध में कांग्रेस के राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और 'कॉकरोच जनता पार्टी' के कार्यकर्ता शामिल हैं, और उन्होंने विशेष रूप से मुसलमानों जैसे अल्पसंख्यकों को निशाना बनाते हुए आरोप लगाए हैं। आयोग ने एसआईआर को डुप्लिकेट, मृत या अपात्र मतदाताओं को हटाने के साधन के रूप में स्पष्ट किया।

अल जज़ीरा की रिपोर्ट

क़तर के अल जज़ीरा ने 6 अक्टूबर को बताया कि प्रदर्शनकारियों ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की माँग की और एसआईआर के दौरान दस्तावेज़ी जटिलताओं से लाखों योग्य वोटरों के बाहर होने का जोखिम उजागर किया। विश्लेषण में कहा गया कि कुछ क्षेत्रों में वोटर सूची में 30 प्रतिशत तक कमी आ सकती है, और युवा आंदोलन को विपक्ष के साथ मिलकर एक बड़ी चुनौती माना गया।

पाकिस्तानी मीडिया का कवरेज

पाकिस्तान के डॉन ने 7 अक्टूबर को इस मुद्दे को मोदी के तीसरे कार्यकाल में नई राजनीतिक चुनौती के रूप में प्रस्तुत किया, जिसमें राहुल और प्रियंका गांधी की हिरासत और चुनाव आयोग पर आरोप शामिल थे। जियो न्यूज़ ने 5 अक्टूबर को बताया कि विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार को भाजपा के इशारों पर काम करने का आरोप लगाया, और दो पूर्व चुनाव आयुक्तों के बीच असहमति को भी उजागर किया।

अन्य विदेशी आउटलेट्स

  • जर्मनी की डॉयचे वेले
  • अमेरिकी फॉरेन पॉलिसी (स्टैनफोर्ड हूवर इंस्टीट्यूट के विश्लेषण के साथ)

संभावित राजनीतिक प्रभाव

फॉरेन पॉलिसी में सुमित गांगुली ने कहा कि एसआईआर विवाद ने भाजपा के सामने 2014 के बाद की सबसे गंभीर चुनौती खड़ी की है, बशर्ते कांग्रेस, सीजेपी और क्षेत्रीय दल इस मुद्दे पर एकजुट रहें। विपक्ष की संगठित क्षमता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि यदि आंदोलन जारी रहा तो यह मोदी सरकार के लिए बड़े चुनावी जोखिम में बदल सकता है।



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