बयान के अनुसार, गोगिया ने वर्ष 2022-23 में भोपाल का दौरा किया और तनुज सेठी के माध्यम से दीपम रायचूरा से मुलाकात करवाई। गोगिया ने बताया कि रायचूरा आबकारी विभाग में सहायक आयुक्त हैं और उन्होंने गोगिया को दीपक दुबे से मिलवाया, यह कहकर कि वह उनका काम देखता है।
कथित रूप से, 2024-25 में गोगिया ने रायचूरा की मदद से टीटी नगर क्षेत्र में दो शराब दुकानों के ठेके जसवंत कुमार के नाम पर दिलवाए। इन ठेके के लिए बैंक गारंटी के रूप में फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद (एफडीआर) का उपयोग किया गया, जिसे मंजूरी देने में ओएसडी की भूमिका का आरोप लगाया गया है।
ब्यौरे में यह भी कहा गया है कि फर्जी एफडीआर के आधार पर बिना लाइसेंस के शराब बिक्री करने में सहायता प्रदान की गई। यह आरोप इस बात की ओर इशारा करता है कि ओएसडी ने न केवल वित्तीय लेन‑देन में बल्कि नियामक प्रक्रिया में भी अनियमित सहायता की।
वर्तमान में इस मामले की जांच के लिए कोई आधिकारिक कार्रवाई या पुलिस रिपोर्ट जारी नहीं हुई है, परंतु सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस बयान की सत्यता को लेकर चर्चा जारी है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह घटना मध्यप्रदेश की राजनीति और सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता के सवाल उठाएगी।

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