7 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम में नायर ने स्टार्ट‑अप्स द्वारा 300 किलोग्राम पेलोड क्षमता वाले रॉकेट विकसित करने के उद्देश्य पर सवाल उठाया। उन्होंने बताया कि इसरो का स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV) 500 किलोग्राम तक का पेलोड ले जा सकता है, और स्टार्ट‑अप्स के प्रयास तभी मूल्यवान होंगे जब वे लागत‑प्रभावी, विश्वसनीय और तेज़ टर्न‑अराउंड टाइम वाले लॉन्च वाहन प्रदान कर सकें।
सेमिनार के मुख्य बिंदु
- इसरो अकेले ही चंद्रमा पर मानव मिशन और भारत अंतरिक्ष स्टेशन की योजना को संपूर्ण रूप से तैयार, विभाजित और शीघ्रता से कार्यान्वित कर सकता है।
- भविष्य में इसरो, स्टार्ट‑अप्स और बड़े उद्योग के बीच सहयोगात्मक माहौल बनाना आवश्यक है, प्रतिस्पर्धा नहीं।
- नायर ने बताया कि इसरो‑प्राइवेट उद्योग संबंध 50 वर्ष पहले एसएलवी‑3 परियोजना से शुरू हुए थे, इसलिए निजी कंपनियों की भूमिका में नई आशंका नहीं है।
- विदेशी निधियों से जुड़ी संभावनाओं को लेकर सरकार को सतर्क रहना चाहिए, इस पर उन्होंने टिप्पणी की।
सेमिनार में विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर के पूर्व निदेशक एम.सी. दाथन, पूर्व केएल्ट्रॉन चेयरमैन एवं इसरो के अनुभवी एन. नारायण मूर्ति, इसरो पेंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ए.जी. राजेंद्रन और जनरल सेक्रेटरी जॉन्सन एस. फर्नांडीज ने भी अपने विचार रखे। यह रिपोर्ट 7 अक्टूबर 2026 को शाम 10:05 बजे आईएसटी पर प्रकाशित हुई।

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