नई पद्धति से GDP का सटीक अनुमान
सांख्यिकी मंत्रालय ने 2022‑23 को आधार वर्ष मानते हुए जीडीपी के आकलन में बदलाव किया है। अब निजी अंतिम उपभोग व्यय (पीएफसीई) के अनुमान 46 मदों से बढ़कर लगभग 128 मदों तक पहुँचेंगे।
इस बदलाव का उद्देश्य लोगों के खर्च को खाने‑पीने, कपड़े, मकान, किराएदारी, परिवहन, मनोरंजन, शिक्षा और इलाज पर विस्तृत रूप से समझना है। इससे सरकार को यह पता चलेगा कि कौन‑कौन सी वस्तुओं और सेवाओं की मांग बढ़ रही है और उपभोग के रुझान कहाँ बदल रहे हैं।
इसके अलावा, यूपीआई और वेतन के आंकड़ों को भी ध्यान में रखकर सेवा क्षेत्र की गतिविधियों का आकलन बेहतर बनाने की योजना है।
क्या नया होगा?
- 128 मदों के माध्यम से उपभोग के विस्तृत आंकड़े जुटाए जाएँगे।
- खाद्य, कपड़े, मकान, किराया, परिवहन, मनोरंजन, शिक्षा और इलाज पर खर्च की निगरानी।
- UPI और वेतन डेटा से सेवा क्षेत्र की गतिविधियों का बेहतर मूल्यांकन।
इन बदलावों से भारत की आर्थिक प्रगति और महंगाई की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट रूप से सामने आएगी। नया ढाँचा सरकार को उपभोग के बदलते रुझानों को समझने में मदद करेगा।

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