दिल्ली। गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में तीव्र गिरावट देखी गई। सेंसेक्स 1,045.46 अंक गिरकर 71,593.24 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 ने 371.25 अंक की गिरावट दर्ज कर 22,231.80 पर पहुँचा। इस एक दिन की बिकवाली से निवेशकों को लगभग 11.37 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
सत्र की शुरुआत में सेंसेक्स 72,668.00 पर खुला था और निफ्टी 22,599.05 पर। दोनों सूचकांकों ने क्रमशः 71,327.75 और 22,179.90 के निचले स्तर को छुआ। कुल बाजार पूंजीकरण 4,72,35,273.39 करोड़ रुपये से घटकर 4,60,97,838.63 करोड़ रुपये रह गया।
बाजार गिरावट के प्रमुख कारण
- आरबीआई ने रेपो दर को 25 आधार बिंदु बढ़ाकर 5.50% कर दिया और मौद्रिक नीति को "तटस्थ" से "कैलिब्रेटेड सख्ती" में बदल दिया, जिससे ब्याज दर में आगे वृद्धि की उम्मीदें बढ़ी।
- कच्चे तेल की कीमतों में उछाल हुआ; ब्रेंट क्रूड 4.25% बढ़कर 104.46 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई 4.15% बढ़कर 91.94 डॉलर पर पहुंचा।
- विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने लगातार पैसा निकाला, बुधवार को 6,121.37 करोड़ रुपये की बिकवाली की और पिछले नौ सत्रों में कुल 57,000 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की।
- वैश्विक बॉन्ड यील्ड में वृद्धि, विशेषकर अमेरिका की 30‑वर्षीय बॉन्ड यील्ड 5.71% के पार, ने इक्विटी से धन को डेट मार्केट की ओर मोड़ दिया।
- रुपया 96.78 पर लगभग सपाट बंद हुआ, जो मई के सर्वकालिक निचले स्तर 96.96 के करीब है, और तेल कीमतों व विदेशी फंड निकासी से दबाव में रहा।
धातु, रियल एस्टेट, स्वास्थ्य सेवा, ऑटो और तेल‑गैस जैसे प्रमुख सेक्टरों में भारी गिरावट दर्ज हुई, जबकि निफ्टी आईटी सूचकांक में केवल 0.08% की मामूली गिरावट रही। तकनीकी तौर पर निफ्टी ने 22,500 के समर्थन स्तर को तोड़ दिया, जिससे 22,300 और 52‑सप्ताह के निचले स्तर 22,180 तक गिरने का जोखिम बढ़ा।
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