पोस्ट में मस्क ने कहा कि अंबानी भारत के "असली बॉस" हैं और उन्होंने भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को मोनोपोली के रूप में रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी बताया कि स्टारलिंक की सेवा दूर‑दराज़ क्षेत्रों में इंटरनेट पहुँचाने, शिक्षा और छोटे व्यवसायों को बढ़ावा देने तथा आपदा के समय संचार बाधित होने पर जीवनरक्षक भूमिका निभा सकती है।
मस्क ने इस हफ्ते कई बार भारत के सैटेलाइट मार्केट पर अपनी असंतोष व्यक्त किया। पहले दिन उन्होंने बिना नाम बताए बड़े व्यवसायियों के स्टारलिंक को रोकने का संकेत दिया, दूसरे दिन सीधे अंबानी का नाम लेकर सवाल उठाया, और तीसरे दिन उन्हें "प्राइम मिनिस्टर" कहा।
भारत सरकार ने इन आरोपों को खारिज कर दिया। टेलीकॉम मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस में कहा कि भारत में तीन कंपनियों—एयरटेल के समर्थन वाली यूटेलसैट वनवेब, रिलायंस जियो (मुकेश अंबानी) और स्टारलिंक—के पास सैटेलाइट इंटरनेट का लाइसेंस है। उन्होंने बताया कि स्पेक्ट्रम और राजस्व शुल्क तय होते ही स्पेक्ट्रम आवंटित किया जाएगा, और सभी सुरक्षा शर्तें पूरी करने के बाद कंपनियां संचालन शुरू कर सकती हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया कि भारत में कोई एकल कंपनी को मोनोपोली नहीं दी जाएगी और उपभोक्ताओं को अपनी सेवा प्रदाता चुनने की स्वतंत्रता होगी। इस बीच, स्टारलिंक की मंजूरी की प्रक्रिया में आगे की प्रगति पर नज़र रखी जा रही है।

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