भोपाल। राजधानी भोपाल को देश के आधुनिक तकनीकी केंद्रों की कतार में खड़ा करने के लिए राज्य शासन ने विस्तृत कार्ययोजना को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। शहर को एक साथ एआई सिटी, नॉलेज सिटी और साइंस सिटी के त्रिस्तरीय मॉडल के तौर पर विकसित करने की दिशा में तकनीकी शिक्षा विभाग और औद्योगिक नीति निवेश प्रोत्साहन विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। इस परियोजना का मुख्य केंद्र बिंदु शहर के शैक्षणिक संस्थानों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच तालमेल बैठाना है, ताकि स्थानीय स्तर पर अत्याधुनिक अनुसंधान को बढ़ावा मिल सके।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, भोपाल में उच्च स्तरीय तकनीकी ढांचा स्थापित करने के लिए भदभदा और कलियासोत क्षेत्र के आसपास नॉलेज कॉरिडोर का विस्तार किया जाएगा। इसके तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर के कंप्यूटिंग लैब्स और डेटा केंद्रों को आकर्षित करने के लिए विशेष रियायतें दी जाएंगी। इस तकनीकी बदलाव का सबसे बड़ा लाभ इंजीनियरिंग और डेटा साइंस के विद्यार्थियों को मिलेगा, जिन्हें अब इंटर्नशिप और शोध के लिए दूसरे महानगरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। परियोजना में स्थानीय विश्वविद्यालयों के 10 हजार से अधिक शोधकर्ताओं को आगामी दो वर्षों में वैश्विक स्तर की एआई तकनीकों पर प्रत्यक्ष कार्य करने का अवसर प्रदान किया जाएगा।
इसके साथ ही, नगर निगम और स्मार्ट सिटी मिशन भी नागरिक सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का समावेश करने जा रहे हैं। शहर के यातायात नियंत्रण, जल वितरण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में मशीन लर्निंग आधारित प्रणालियां लगाई जा रही हैं। सरकार का मानना है कि इस पहल से भोपाल न केवल तकनीकी नवाचार का केंद्र बनेगा, बल्कि बहुराष्ट्रीय तकनीकी कंपनियों को भी मध्य प्रदेश में अपने परिसर खोलने के लिए आकर्षित करेगा। तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह ढांचा समय पर तैयार हो गया, तो भोपाल मध्य भारत की सबसे बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था के रूप में उभरेगा।
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