भोपाल। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) की तैयारी कर रहे भोपाल के हजारों युवा अभ्यर्थियों के लंबे समय से चले आ रहे असमंजस और तनाव को दूर करते हुए शासन ने वर्ष 2027 से राज्य सेवा प्रारंभिक और मुख्य परीक्षाओं को वर्ष में दो बार आयोजित कराने की कार्ययोजना पर मुहर लगाई है। राजधानी के महाराणा प्रताप नगर, भंवरकुआं मॉडल वाले कोचिंग परिसरों और विभिन्न छात्र छात्रावासों में वर्षों से लंबित परिणामों और भर्ती चक्र में होने वाली देरी को लेकर असंतोष पनप रहा था।
नई व्यवस्था के तहत संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के वार्षिक कैलेंडर की तर्ज पर एमपीपीएससी का एक समयबद्ध और सख्त वार्षिक कार्यक्रम तय किया जाएगा। इसके अंतर्गत अधिसूचना जारी होने से लेकर परिणाम और साक्षात्कार तक की पूरी प्रक्रिया अधिकतम छह से आठ महीनों के भीतर संपन्न करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा, साल में दो बार परीक्षा होने से उन अभ्यर्थियों का पूरा साल खराब नहीं होगा जो किसी कारणवश कुछ अंकों से मुख्य परीक्षा या साक्षात्कार में असफल रह जाते हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले शिक्षकों का कहना है कि नियमित चक्र होने से विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और वे योजनाबद्ध तरीके से अध्ययन कर सकेंगे। युवाओं की लंबे समय से यह भी मांग थी कि पाठ्यक्रम में समसामयिक बदलाव किए जाएं ताकि वे राज्य सेवा के साथ-साथ अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के लिए भी समान रूप से तैयार हो सकें। आयोग ने तकनीकी बदलावों को अपनाते हुए उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन और परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की आधुनिक व्यवस्था लागू करने की भी तैयारी की है ताकि पूरी चयन प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे।
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